जानें, किसी भी शुभ कार्य के पूर्व क्यों खिलाते हैं दही-शक्कर?

जानें, किसी भी शुभ कार्य के पूर्व क्यों खिलाते हैं दही-शक्कर?

अक्सर देखा जाता है कि जब भी घर का कोई सदस्य किसी शुभ काम के लिए घर से बाहर जाता है तो उसे दही खिलाई जाती है। हमारे समाज में ये पंरपरा सदियों से चली आ रही है। इसकी मुख्य वजह है, हिंदू धर्म में दही को पांच अमृत माना जाना।


जानकारों का कहना है कि अगर हमारा मन किसी दुख देने वाली बात में उलझा हुआ है तो दही खा लेनी चाहिए। दही खाने से मन खुश हो जाता है। अगर मन खुश होता है तो किसी भी काम को अच्छे से किया जा सकता है।

कई बार दही और चीनी दोनों को खाया जाता है, क्योंकि दही में खटास होती है तो वहीं चीनी में मिठास होती है। खट्टा-मिठा खाने से मन से बुरे विचार दूर हो जाते हैं। दही को खाने के कई धार्मिक कारण भी हैं, ज्योतिषियों के मुताबिक सफेद रंग को चंद्रमा का कारक माना जाता है। कहा जाता है कि जब भी किसी सफेद चीज को खाकर घर के बाहर निकला जाता है तो मन में एकाग्रता बढ़ती है और किसी भी कार्य को अच्छे से किया जा सकता है।

घर से निकलने के पहले दही खाने से नकारात्मक ऊर्जा खत्म होती है और मन में किसी तरह के नकारात्मक विचार नहीं आते। साथ ही हमारे मन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार भी होता है।

डॉक्टरों के मुताबिक दही खाना सेहत के लिए अच्छा होता है। दही खाने से आंतों के अंदर के कई बुरे जीवाणु मर जाते हैं। अगर दही में नमक और हींग जीरा मिलाकर खाया जाता है तो ये शरीर के लिए बहुत लाभदायक होता है।

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