ज्योतिष – एक श्रापित विद्या क्यों है?

ज्योतिष – एक श्रापित विद्या क्यों है?

ज्योतिष के अनुसार सात्विक शक्तियां सूर्य, चंद्रमा और बृहस्पति कमजोर अवस्था में जब-जब धर्म की हानि होती है, प्रलय की स्थिति उत्पन्न होती है। ज्योतिष विज्ञान की दृष्टि से कोरोना वायरस जैसे संकट तब उत्पन्न होते हैं जब प्रकृति की सात्विक शक्तियां सूर्य, चंद्रमा और बृहस्पति कमजोर अवस्था में गोचर कर रहे होते हैं। 


ज्योतिष को माँ सती से श्राप मिला हुआ है।
कैसे?
ये कहानी पढें:-
एक बार की बात है । एक दिन नारद जी भगवान के नामों का गुण गान करते हुए कैलाश पर्वत पर पहुँचे तो भगवान सदा की तरह शिव के दर्शन हुए परन्तु माता सती नही दिखाई दी। नारद जी ने माता के विषय में पुछा तो
तो भगवान शिव जी ने कहा “नारद जी, आप तो ज्योतिष के ज्ञाता हो। बताओ अभी सती कहाँ है?”

नारद जी ने ज्योतिषीय गणना की और कहा, “माँ अभी स्नान कर रही हैं। और इस समय उनके शरीर पर एक भी वस्त्र नहीं है।

कुछ समय बाद माता सती आईं तो भगवान ने उस समय के बारे में पुछा
और नारद जी की बात बताई।

इस पर माँ बोली –
“नारद जी आपकी गणना बिल्कुल सही है। पर जो विद्या व्यक्ति के कपडे के भी पार देख ले वह अच्छी नहीं। इसलिए मैं इस विद्या को श्राप देती हूँ कि कभी भी कोई ज्योतिषी पूरा-पूरा नहीं देख पाएगा।“

किन्तु जो ज्योतिषी किसी की मदद करेगा। जिसका इष्ट में पूरा विश्वास होगा।
सच्चे हृदय से ज्योतिष को जानेगा। उसकी गणना सम्पूर्ण सत्य होगी।

कथा का सारांश:-

अगर ईश्वर ने आपको एक शक्ति दी है, तो कुछ जिम्मेदारी भी है निभाने के लिए। एक ज्योतिषी का दायित्त्व है कि अपने यजमान को ढाँके। ना की उसकी आर्थिक उगाही करें। यजमान की आर्थिक और सामाजिक रक्षा करते हुए उसकी समस्याओं से उसे निकलने के लिए मार्गदर्शन करे।

यदि ज्योतिषी अपनी सीमा लाँघेगा तो उसे माँ सती का श्राप अवश्य लगेगा और फिर उसकी गणनायें भी असफल होंगी तथा पारिवारिक अवनति भी होगी।।

आज के समय में कुछ लोगों ने ज्योतिष को व्यापार का साधन बना लिया और वे अधकचरा ज्ञान लेकर ज्योतिष की दुकान चला रहे हैं और महापंडित बने हुए हैं जब उनकी भविष्यवाणी गलत हो जाती है तो लोगों को ज्योतिष विज्ञान से विश्वास समाप्त होना शुरू हो जाता है।

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