क्यों गर्भवती महिला को नही छूना चाहिए शिवलिंग?

क्यों गर्भवती महिला को नही छूना चाहिए शिवलिंग?

भगवान शिव का पावन पर्व महाशिवरात्रि आ गया है और हर कोई इसकी तैयारी में लगा है। इस दिन भोलेनाथ की पूजा विशेष फलदायी होती है तो हर भक्त चाहता है कि वह अपने हाथों से भोलेबाबा की पूजा करने का सौभाग्य प्राप्त कर सके। शिवलिंग को भगवान शिव का स्वरूप मानकर उस पर जलाभिषेक करके पूजा की जाती है। लेकिन गर्भवती महिलाओं का शिवलिंग को छूना अशुभ माना जाता है। जी हां, गर्भवती महिलाओं को भूलकर भी इस दिन शिवलिंग को छूने या पूजा करने की गलती नहीं करनी चाहिए। महाशिवरात्रि का पर्व 21 फरवरी 2020 को मनाया जाएगा तो चलिए जानते हैं क्या कहता है शास्त्र के इसके बारे में…

माना जाता है कि गर्भवती महिला को पांचवां महीना खत्म होकर छठे महीने के शुरू होने पर शिवलिंग ही नहीं किसी भी देवता की मूर्ति को नहीं छूना चाहिए। अगर वह मंदिर भी जाती है तो उसे मंदिर के गर्भगृह में नहीं जाना चाहिए और पूजा भी स्वयं नहीं करना चाहिए बल्कि किसी से करवा लेना चाहिए। शास्त्रों के अनुसार जैसे ही गर्भवती स्त्री पांचवां महीना पूर्ण करके छठे महीने में प्रवेश करती हैं। उस समय वह गर्भवती स्त्री शारीरीक रूप और मानसिक रूप से कमजोर होती है । इसी कारण से महाशिवरात्रि पर शिवलिंग का छूना भी गर्भवती महिलाओं के लिए वर्जित माना जाता है।

गर्भवास्था में प्रत्येक स्त्री एक नए जीव को जन्म देने वाली होती है जो उसके गर्भ में पल रहा होता है। इसी कारण से किसी स्त्री को गर्भ दोष न लगे इसलिए शिवलिंग और किसी भी देव स्पर्श को इस समय में न करने के लिए कहा जाता है। यदि कोई गर्भवती स्त्री महाशिवरात्रि का व्रत रख रही है तो वह सभी शिवलिंग को स्पर्श न करे अपनी जगह अपने पति से शिवलिंग की पूजा करा लें । यदि यह संभव न हो तो आप मंदिर के पुजारी जी से अपनी जगह शिवलिंग की पूजा करा सकती हैं। इसके साथ ही आप भगवान शिव के मंत्रों का जाप और शिव स्तुति आदि भी कर सकती हैं।

कुछ ऐसी बातें जो भगवान शिव की पूजा करते समय ध्‍यान रखनी चाहिए

परिक्रमा हमेशा शिवलिंग के बाईं ओर से शुरू करें और जहां से भगवान को चढ़ाया जल बाहर निकलता है, वहां तक जाकर वापस आ जाएं और फिर विपरीत दिशा में जाकर जलाधारी के दूसरे सिरे तक आकर परिक्रमा को पूरा करें।

जहां से शिवलिंग पर चढ़ा जल बाहर निकलता है वहां ऊर्जा और शक्ति का परम भंडार होता है। इस स्‍थान को लांघने से शारीरिक क्रियाओं पर ऊर्जा बुरा असर पड़ सकता है। इसलिए इस स्‍थान को लांघा नहीं जाता है।

प्रसाद को कभी शिवलिंग के ऊपर न रखें। मान्‍यता है कि शिवलिंग के ऊपर रखा गया प्रसाद ग्रहण नहीं किया जाता है और ऐसा होने पर पूजा में दोष लगता है।

आशा करते हैं की आपको हमारा आर्टिकल पसंद आया होगा, आप अपनी कोई समस्या या राय नीचे बने कॉमेंट बॉक्स में छोड़ सकते हैं| महाशिवरात्रि को आपको ढेरों बधाई, महाकाल आप सभी पर अपनी कृपा सदेव बनाएँ रखें|

जय महाकाल🙏

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