कौन होते हैं गुरु एवं क्या है गुरुमंत्र?

Image

कौन होते हैं गुरु एवं क्या है गुरुमंत्र?

गुरु का मतलब क्या है शिष्य कौन और क्या पुरक है? दोनो में गुरु का बोध शिष्य को हो तभी तो गुरु तत्व जाग्रत अवस्था मे आता है। बिना गुरु नाम का बोध हुये आप कैसे शिष्य हो ये हमे नही पता गुरु अपने आप में महा बीज मंत्र है गुरु किसी इंसान को कहा जाता है या नही ये आप की अवस्था पर निर्भर है।

जब तक आप अपने अंदर गुरु नाम का दीप नही जला लेते तब तक गुरु शिष्य का रिश्ता बेमानी है। सबसे पहले आप में अपने गुरु के प्रति आदर भाव होना जरुरी है उनका चेहरा नही चरण देखना जरुरी है। जो गुरु चरणो का चहेता बन गया उस पर इष्ट कृपा भी जल्दी होती है।

बाकी जगत पिता के कई पुत्र हैं जो अपने आपको उनके चेले मानते हैं। जैसे जगत पिता ने उनको क्रिया दी हो, मंत्र दिये हो पर आजकल सब संभव है, इसमे कोई बडी बात नही है। कोई बोतल मे जिन्न, भूत के नाम से बंद बोतल मे भूत जिन्न बेच रहा है, कोई पैसे लेकर देवी यक्षिणी की साधना करा रहा है। साधना करने से पहले उससे ये तो पूछिये की उसने देवी यक्षिणी की साधना की है। अथवा उसका अनुभव है क्या?

या कोई देवी कर्णपिशाचिनी साधना बेच रहा है या कोई शिविर लगाकर शाबर साधना या दिक्षा दे रहा है उनसे इनका सामान्य ज्ञान लें पहले। उनका अनुभव कैसा था ओर उनके पास है क्या? कुछ ही दिनों मे कोई साधक नही बन सकता उसमें समय लगता है।

जिनके गुरु का पता नही गुरु स्थान का पता नही वो आजकल आचार्य बने हुये है किताबी ज्ञान से बस रटे रटाये शब्दो का ज्ञान देने से पहले कोई उनका मर्म नही समझ पाते बस सबको मारण, मोहन, वशीकरण, उच्चाटन और प्रेत साधना या कोई देवीयो को प्रकट करने लगा है।जिनका इनसे कोई दुर दुर का नाता नही उनका गुरु ओर शिष्य का संबंध इन सभी साधनाओ तक ही सीमित रह गया है।

क्या इसलिए गुरु की जरुरत पडती है क्या बुरी शक्तियों को प्रकट होना या अच्छी शक्तियां का प्रकट होना आपके अनुसरण पर निर्भर है? किसी और पर नही गुरु तूल्य होना या गुरु होना या बनाना ये आप पर निर्भर है। गुरु नाम वो ब्रम्हास्त्र है जो आपकी जिंदगी भर रक्षा करता है ये आपकी ढाल है इसलिए आप में गुरु तत्व का उत्पन्न होना जरुरी है।

जब तक आप अपने और गुरु के प्रति वफादार नही रह सकते कोई आपमे सिद्धि या साधना जैसी वस्तू उत्पन्न नही कर सकता। उसको पाने की तमन्ना अच्छी है पर जब तक गुरु ना कहे उससे दूर रहो यह भी सत्य है।

गुरु बिना शिष्य उस डाली की तरह होता है जो पेड से टूट कर लटक चूकी हो। हर साधना मे गुरु मंत्र का विशेष महत्व होता यही आपका सुरक्षा कवच होता है इसलिए जब भी कोई साधना करें, गुरु मंत्र का जप शुरुआत मे बीच मे अंत मे जरूर करे आपको सफलता जरूर मिलेगी।

जो गुरु मुखी होते है वो दुसरे गुरु की निंदा भी नही करते जितना अपने गुरु का सम्मान करते हो उतना ही दूसरे गुरुओ का सम्मान भी करें। पहले स्वयं को परखें फिर आगे बढ़ें।

यदि आपके पास वेद-पुराण, कुंडली या हिन्दू संस्कृति से सम्बंधित सवाल हो तो आप हमसे संपर्क कर सकते हैं, हमारा ईमेल id है info@jaymahakaal.com

साथ ही आप हमारे फेसबुक पेज www.facebook.com/JayMahakal01, ट्विटर, और इंस्टाग्राम @jaymahakaal01 को like और share करें और नित नई जानकारियो के लिए हमसे जुड़े रहिये और विजिट करते रहिए।

www.jaymahakaal.com

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *