क्या है शक्ति एवं विश्वास

SHIV

क्या है शक्ति एवं विश्वास

भक्ति, श्रद्धा , विश्वास एवं धैर्य साधना मार्ग के चार स्तम्भ हैं। हमारी साधना का प्रतिफल इन्ही चार स्तम्भों पर निर्भर करता है। जो लोग ये कहते हैं की उन्हें मंत्रो से कोई लाभ नहीं मिला तो उन्हें समझ लेना चाहिए कि उनमे स्वयं ही कोई कमी है।

आजकल ऐसा देखने में आता है कि लोग एक – दो अनुष्ठान करने के बाद ही अपना धैर्य खो देते हैं और अपने गुरु, मंत्र एवं इष्ट पर अविश्वास करने लगते हैं। एक साधक को इस तरह धैर्य नहीं खोना चाहिए। ऐसा कोई भी व्यक्ति इस संसार में नहीं है जिसे कोई कष्ट या दुःख नहीं है। स्वयं भगवान् राम एवं कृष्ण के जीवन से हमे ये सीख लेनी चहिये जिन्होंने अपने जीवन में अनेको कष्टों का सामना किया।

जो लोग अविश्वास करके अथवा लाभ न मिलने के कारण गुरु, मंत्र एवं देवता को बदल देते हैं वो नरकगामी होते हैं एवं अन्य देवता भी उन्हें शरण नहीं देते। कितना भी कष्ट क्यों न आ जाये हमे अपने गुरु, मंत्र एवं देवता को नहीं त्यागना चहिये। प्राचीन काल में जितने भी साधक एवं ऋषि हुए हैं उन्होंने एक ही देवता की तब तक उपासना की है जब तक वो देवता स्वयं उनके सामने वरदान देने के लिए नहीं आ गये।.

लंकापति भक्त शिरोमणि दशानन रावण ने हजारों वर्ष तपस्या की एवं भगवान् को स्वयं आकर वरदान देने के लिए विवश कर दिया। हमें उन लोगो से सीख लेनी चाहिए। किसी भी मंत्र एवं देवता में उतनी ही शक्ति होती है जितना आपका उन पर विश्वास होता है।

इसलिये विश्वास आपका शक्ति उसकी इसलिए जितना भी समय रोज उसको दे सको देदे माँ बाबा सैदव आपके है पर उनको अपना बनाना आपके हाथ है हमारे या किसी ओर के नही।

यदि आपके पास वेद-पुराण, कुंडली या हिन्दू संस्कृति से सम्बंधित सवाल हो तो आप हमसे संपर्क कर सकते हैं, हमारा ईमेल id है @jaymahakaal01@gmail.com

साथ ही आप हमारे फेसबुक पेज www.facebook.com/JayMahakal01, ट्विटर, और इंस्टाग्राम @jaymahakaal01 को like और share करें और नित नई जानकारियो के लिए हमसे जुड़े रहिये और विजिट करते रहिए।www.jaymahakaal.com

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *