क्या है भक्ति?

Hanuman

क्या है भक्ति?

” भक्ति “

कोई भी इंसान गुस्सैल नहीं होता, कोई भी इंसान कष्ट में या आनंद में नहीं होता, कोई इंसान प्रेम में या भक्ति में नहीं होता, लेकिन वह खुद को इनमें से किसी में भी विकसित कर सकता है।

अगर हम चाहें तो गुस्सैल हो सकते हैं प्रेमपूर्ण हो सकते हैं, शांत हो सकते हैं या भक्त हो सकते हैं। भक्ति की अवस्था में आने का मतलब है कि हम अपने भावों को एक ऐसी स्थिति तक ले आए, जहां उनकी मिठास बाहरी परिस्थितियों की वजह से खो नहीं सकती।

जब हम किसी को प्रेम करते हैं तो हमारे भाव मीठे हो जाते हैं। लेकिन कल वही शख्स हमारे साथ कुछ बुरा कर दे तो हमारे भाव कड़वे, बेहद कड़वे हो जाएंगे।

भक्ति का मतलब होता है कि हमने अपने भावों को ऐसा बना लिया है कि कोई भी चीज उन्हें बिगाड़ नहीं सकती। भक्ति है तो कोई और हमारे भावों में उथलपुथल नहीं मचा सकता।

हमारे भावों में हमने मिठास का एक खास पहलू घोल दिया है, जिसे बाहरी स्थितियां चुरा नहीं सकतीं।

यदि आपके पास वेद-पुराण, कुंडली या हिन्दू संस्कृति से सम्बंधित सवाल हो तो आप हमसे संपर्क कर सकते हैं, हमारा ईमेल id है info@jaymahakaal.com

साथ ही आप हमारे फेसबुक पेज www.facebook.com/JayMahakal01, ट्विटर, और इंस्टाग्राम @jaymahakaal01 को like और share करें और नित नई जानकारियो के लिए हमसे जुड़े रहिये और विजिट करते रहिए।

www.jaymahakaal.com

जय माँ। जय बाबा महाकाल।।
अलख आदेश।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *