क्या है अक्षय तृतिया? क्यों मानते हैं इसे इतना शुभ?

क्या है अक्षय तृतिया? क्यों मानते हैं इसे इतना शुभ?

अक्षय तृतीया या आखा तीज दरअसल विक्रमी संवत कैलेंडर के वैशाख मास में शुक्ल पक्ष की तृतीया (तीसरी) तिथि को कहते हैं। पौराणिक मान्‍यता है कि इस दिन किया जाने वाला कोई भी शुभ कार्य शुभ फलदायी ही होता है। वैसे तो सभी बारह महीनों की शुक्ल पक्षीय तृतीया शुभ होती है, किंतु वैशाख माह की यह तिथि स्वयंसिद्ध मुहूर्तो में मानी गई है।


अक्षय तृतीया का सर्वसिद्ध मुहूर्त के रूप में भी विशेष महत्व है। मान्यता है कि इस दिन बिना कोई पंचांग देखे कोई भी शुभ व मांगलिक कार्य जैसे विवाह, गृह-प्रवेश, वस्त्र-आभूषणों की खरीददारी या घर, भूखंड, वाहन आदि की खरीददारी से संबंधित कार्य किए जा सकते हैं।

पुराणों में लिखा है कि इस दिन पितरों को किया गया तर्पण तथा पिण्‍डदान या किसी और प्रकार का दान, अक्षय फल प्रदान करता है। इस दिन गंगा स्नान करने से तथा भगवत पूजन से समस्त पाप नष्ट हो जाते हैं। यहां तक कि इस दिन किया गया जप, तप, हवन, स्वाध्याय और दान भी अक्षय हो जाता है।

ऐतिहासिक घटनाओं का साक्षी है ये दिन:

इस तिथि की गिनती युगादि (युग की शुरुआत) तिथियों में होती है। शायद आप नहीं जानते होंगे कि सतयुग और त्रेतायुग की शुरुआत भी इसी दिन से हुई थी।

अक्षय तृतीया के दिन ही वर्तमान उत्‍तराखंड राज्‍य में स्‍थित देश के चार धामों में से एक बद्रीनाथ धाम के कपाट खोले जाते हैं। इससे पूर्व इसी दिन श्री बद्रीनाथ जी की प्रतिमा मंदिर में स्थापित कर पूजन-अर्चन और आम दर्शन की शुरुआत होती है।

पद्म पुराण के अनुसार इसी तृतीया तिथि को महाभारत का युद्ध (द्वापर युग) समाप्त हुआ था। ऐसी मान्यता है कि इस दिन से प्रारम्भ किए गए कार्य अथवा इस दिन को किए गए दान का कभी भी क्षय नहीं होता।

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