क्या है गुड़ी पड़वा पूजन समय?

क्या है गुड़ी पड़वा पूजन समय?

गुड़ी पड़वा का पर्व महाराष्‍ट्र, आंध्र प्रदेश और गोवा के अलावा देश के कई दक्षिण भारतीय राज्‍यों में हर्षोल्‍लास के साथ मनाया जाता है। यह त्‍योहार चैत्र मास के शुक्‍ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से शुरू होने वाले नए साल की शुरुआत को ही मनाने की परंपरा है। गुड़ी का अर्थ होता है ध्‍वज और पड़वा का अर्थ होता है प्रतिपदा।


चैत्र मास के शुक्‍ल पक्ष में जिस दिन सूर्योदय के समय प्रतिपदा हो, उस दिन से नव संवत्‍सर का आरंभ माना जाता है। इसी दिन मराठी विक्रम संतव 2017 शुरू माना जाता है।

प्रतिपदा तिथि प्रारंभ: 5 अप्रैल 2019 को 11:50 बजे
प्रतिपदा तिथि समाप्‍त: 6 अप्रैल 2019 को 12:53 बजे

महाराष्‍ट्र के लोगों के बीच यह त्‍योहार काफी महत्‍वपूर्ण और लोकप्रिय है। इस दिन को नए आभूषण, नई वस्‍तुएं और नए घर को खरीदने के लिए बेहद शुभ मानते हैं। गुड़ी पड़वा के दिन महाराष्ट्र में सभी लोग अपने घरों में गुड़ी की स्थापना करते हैं। गुड़ी एक बांस का डंडा होता है जिसे हरे या पीले रंग के कपड़े से सजाया जाता है। इस कपड़े को बांस के डंडे पर सबसे ऊपर बांधा जाता है। इसके अलावा माला, इस पर नीम और आम के पत्ते भी बांधें जाते हैं। सबसे ऊपर तांबे या चांदी का लोटा रखा जाता है। गुड़ी को लोग भगवान बह्मा के झंडे के रूप में देखते हैं। इसकी स्थापना कर लोग भगवान विष्णु और बह्मा के मंत्रों का उच्चारण कर उनसे प्रार्थना करते हैं।

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