Tag: #Hindusanskritiaurmithak

चार मुखी रुद्राक्ष के महत्त्व, लाभ और धारण मन्त्र

४ मुखी रुद्राक्ष ४ वेदो का प्रतिनिधित्व करते है, यह रुद्राक्ष गुरु बृहस्पति और माँ सरस्वती की शक्तियों का प्रतिनिधि भी माना जाता है, गुरु बृहस्पति की ऊर्जा से भरपूर यह रुद्राक्ष पहनने वाले को ज्ञान के चारो आयामों को खोल देता है।

Continue Reading

शिव ने लिए कई अवतार, जानिये क्या है उनका आधार

शिव महापुराण में भैरव को परमात्मा शंकर का पूर्ण रूप बताया गया है। एक बार भगवान शंकर की माया से प्रभावित होकर ब्रह्मा व विष्णु स्वयं को श्रेष्ठ मानने लगे। तब वहां तेज-पुंज के मध्य एक पुरुषाकृति दिखलाई पड़ी। उन्हें देखकर ब्रह्माजी ने कहा- चंद्रशेखर तुम मेरे पुत्र हो। अत: मेरी शरण में आओ। ब्रह्मा की ऐसी बात सुनकर भगवान शंकर को क्रोध आ गया। उन्होंने उस पुरुषाकृति से कहा- काल की भांति शोभित होने के कारण आप साक्षात कालराज हैं। भीषण होने से भैरव हैं। भगवान शंकर से इन वरों को प्राप्त कर कालभैरव ने अपनी अंगुली के नाखून से ब्रह्मा के पांचवें सिर को काट दिया।

Continue Reading

किस दिन करें शिव आराधना, कौन-सा है सबसे शुभ वार

वैसे तो भोलेनाथ की भक्ति के लिए कोई भी दिन तथा वार उत्तम है लेकिन किसी खास प्रायोजन जैसे मानसिक शांति, आर्थिक परेशानी या मृत्युभय से मुक्ति पाने के लिए सोमवार तथा अष्टमी का बहुत महत्व माना जाता है।

Continue Reading

क्यों संघर्ष कर रहा है सनातन धर्म या हिन्दू संस्कृति

क्या आपने कभी सोचा कि हिन्दू संप्रदाय या सनातन धर्म विश्व के प्राचीनतम धर्मो में से एक होने के बावजूद भी आज संघर्ष क्यों कर रहा है, आखिर क्यों इतने ढेर सारे धर्मो का प्रादुर्भाव हुआ, आखिर क्यों ना सारे मनुष्य सनातन धर्मी ही रहें, आखिर मुस्लिमो, ईसाइयो और अन्य धर्मो का प्रादुर्भाव क्यों हुआ?

Continue Reading

कैसे हैं पार्थिव में बसे शिव कल्याणकारी

शिव सनातन देव हैं। दुनियां में जितने भी धर्म है वे किसी न किसी रूप या नाम से शिव की ही अराधना करते है। ये कही गुरू रूप में पूज्य है तो कही निर्गुण,निराकार रूप में। शिव बस एक ही हैं पर लीला वश कइ रूपों में प्रकट होकर जगत का कल्याण करते हैं। शक्ति इनकी क्रिया शक्ति है। सृष्टि में जब कुछ नहीं था तब सृजन हेतु शिव की शक्ति को साकार रूप धारण करना पड़ा और शिव भी साकार रूप में आ पाये इसलिए ये दोनों एक ही हैं।

Continue Reading

शिव के स्वरुप और उनका अर्थ

शिव पुराण में एक शिकारी की कथा है। एकबार उसे जंगल में देर हो गई। तब उसने एक बेल वृक्ष पर रात बिताने का निश्चय किया। जगे रहने के लिए उसने एक तरकीब सोची। वह सारी रात एक-एक पत्ता तोड़कर नीचे फेंकता रहा। कथानुसार, बेल के पत्ते शिव को बहुत प्रिय हैं। बेल वृक्ष के ठीक नीचे एक शिवलिंग था। शिवलिंग पर प्रिय पत्तों का अर्पण होते देख शिव प्रसन्न हो उठे, जबकि शिकारी को अपने शुभ काम का अहसास न था। उन्होंने शिकारी को दर्शन देकर उसकी मनोकामना पूरी होने का वरदान दिया। कथा से यह साफ है कि शिव कितनी आसानी से प्रसन्न हो जाते हैं। शिव महिमा की ऐसी कथाओं और बखानों से पुराण भरे पड़े हैं।

Continue Reading

भाग्य में बाधा डालने वाले कुछ योग

भाग्य बाधा निवारण के उपाय

Continue Reading

क्या हैं ध्यान और उसकी विधियाँ

ध्यान की विधियाँ कौन-कौन सी हैं? ध्यान की अनेकानेक एवं अनंत विधियाँ संसार में प्रचलित हैं. साधकों की सुविधा के लिए विभिन्न शास्त्रों व ग्रंथों से प्रमाण लेकर ध्यान की विधियाँ बताते हैं जिनका अभ्यास करके साधक शीघ्रातिशीघ्र ईश्वर साक्षात्कार को प्राप्त कर सकता है.

Continue Reading