वनस्पति की कुछ रोचक बातें।

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वनस्पति की कुछ रोचक बातें।

आज वनस्पति तंत्र के विधान के बारे में आपको बताते है, पहले आपको अपने अंदर श्रद्धा, विश्वास और आस्था पैदा करनी होती है। किसी भी कार्य को बिना विश्वास करने से हमेशा विफलता ही आती है। किसी भी मंत्र वनस्पति मे मुर्हूत या नक्षत्र की जरुरत होती है बिना नक्षत्र कोई वनस्पति कार्य उतना नही कर पाती है।

एक दिन पहले शाम को निमंत्रण या न्यौता देने जाना होता है, ये उसकी क्रिया है। अपने गुरु देव ओर इष्टदेव को याद करते हुये किसी भी मूल नक्षत्र के एक दिन पहले जिसकी जड़ लानी है उस वनस्पति के पास जाएँ और साथ में जल, अक्षत, रोली, लाल धागा, कच्चे सुत का लाल रंग का कलावा और साथ में धूपबत्ती जरुर हो। सर्वप्रथम पौधे के पास पहुँच कर पौधे को प्रणाम करें और अपने गुरुदेव और इष्टदेव का स्मरण करे फिर यह मंत्र जपें:

मम कार्य सिद्धि कुरु कुरु स्वाहा”

मंत्र जाप करते हुये पुजा जारी रखे। ध्यान रहे अक्षत पूर्ण होने चाहिए, पूजा के लिये सिंदूर, हल्दी, कुमकुम, चावल सब को मिलाकर प्रयोग करना चाहिये, चंदन, रोली, कलावा आदि से पुजा करके धूपबत्ती जलाएं फिर पौधे की टहनी या शाख पर लाल धागा बांध दे। ध्यान रहे इसमे आपकी भावना शुद्ध होनी चाहिए, वनस्पति के रुप मे वो फिलहाल देवता है यही भाव मन मे होना चाहिए। फिर प्रार्थना करे “हे वनस्पति देव मेरा निमंत्रण स्वीकार करें मैं कल प्रातः आपको लेने आऊंगा यह कह कर प्रणाम करके वापस लौट आएं।”

निमंत्रण की प्रक्रिया सुर्यास्त से पहले पूर्ण हो जानी चाहिए, दुसरे दिन उचित नक्षत्र में उस वनस्पति को लाने के लिये सूर्योदय से पहले घर से निकल जाएँ, योग नक्षत्र तक किसी मंदिर मे इंतजार करें, उचित समय पर या योग मे उक्त वनस्पति जिसको लानी है उस पर जल चढाते हुये इस मंत्र का जाप करे –

बेतालाश्च पिशाचाश्च राक्षसाश्च् सरीसृपा, आसर्पयन्तु ते सर्वे वृक्षादस्माच्छि वाग्या”

उसके बाद हाथ जोडकर प्रार्थना करे

“नमस्ते मृत सम्भूते बलवीर्य विवर्धिनी, बलमायुश्च मे देहि पापान मा त्राहि दूरव”

फिर जिस पौधे या वनस्पति का जो अंश प्राप्त करना चाहते है उसको काष्ठशास्त्र से खोदकर या काटकर प्राप्त करे और इस कार्य को करते हुये इस मंत्र का जाप जारी रखे..

“अत्रैव तिष्ठ कल्याणि मम कार्य करी भव, मम कार्य कृते सिद्धे ततः स्वर्ग गमिष्यति,
ॐ ह्रीं चण्डिके हं फट् स्वाहा”

इस तरह वनस्पति को घर लाकर लाकर शुद्ध जल से धोकर अपने पवित्र स्थान पर रख दे फिर जब उसका कार्य हो तब उसका उपयोग करे। हाँ इनको लाने के लिये इक मंत्र ओर भी है दोनो का जाप आवश्यक है

“ॐ वनदण्डे महादण्डाय स्वाहा”

फल फुल जड़ (मूल )पते छाल ,बंदा, बांदा, ये विधी सभी वनस्पति तंत्रो मे काम आती है।

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