नवरात्र के कुछ अनकहे, दिलचस्प तथ्य।

नवरात्र के कुछ अनकहे, दिलचस्प तथ्य।

चैत्र नवरात्र की प्रतिपदा के साथ ही हमारे भारतवर्ष में हिन्दू नव वर्ष का शुभारम्भ हो गया है, नवरात्र का पर्व भारतवर्ष में बहुत ही उत्साह के साथ मनाया जाता है, नवरात्र के दिनों में भक्त देवी माँ की विशेष कृपा प्राप्ति हेतु विभ्भिन्न प्रकार की उपासना और साधना करते है, माता के इस पावन पर्व पर हर कोई उनकी अनुकम्पा पाना चाहता है।

वैसे तो हर किसी को दो नवरात्रि का ज्ञान है लेकिन बहुत कम लोगो को ज्ञात होगा कि एक वर्ष में नवरात्रि ४ बार पड़ती है। साल के प्रथम मास चैत्र में पहली नवरात्रि पड़ती है, जिसे हम चैत्र नवरात्र के नाम से जानते है।

चौथे माह में आषाढ़ में दूसरी नवरात्रि पड़ती है, जो कि गुप्त नवरात्रि के रूप में जानी जाती है इसके बाद आश्विन माह में प्रमुख शारदीय नवरात्र होती है, साल के अंत में माघ माह में चौथी नवरात्रि होती है जो कि पुनः गुप्त नवरात्रि होती है। इन सभी नवरात्रो का ज़िक्र देवी भागवत तथा अन्य धार्मिक ग्रंथो में भी किया गया है, लेकिन सर्वविदित है कि सभी नवरात्रो में चैत्र और शारदीय नवरात्र प्रमुख माने जाते है।

आइये जानते है नवरात्र के वैज्ञानिक, प्राकृतिक आध्यात्मिक और पौराणिक कारणों के बारे में:

वैज्ञानिक कारण:
देखा जाए तो चारो ही नवरात्र मौसमो के संधिकाल में पड़ते है, ऐसे में हमारे शरीर और दिमाग में परिवर्तन अवश्यम्भावी होता है, नवरात्रि के पर्व में व्रत रख कर, पूजा पाठ में ध्यान लगा कर हम तन और मन कि शुद्धि करते है और अपने शरीर और दिमाग को इन भौगोलिक परिवर्तनों से लड़ने कि क्षमता प्रदान करते है।

ऐसे में हमारा शरीर और मन इन परिवर्तनों को सहने के सक्षम हो जाता है और हम हर आने वाले मौसम का स्वागत करने के लिए तन मन से तैयार हो जाते है।

प्राकृतिक कारण:
अगर प्राकृतिक कारणों की बात की जाए तो हम पाएंगे की नवरात्रो के समय ही ऋतू परिवर्तन होता है, गर्मी और शॉट के मौसम के प्रारम्भ से पूर्व प्रकृति में बड़ा परिवर्तन होता रहता है, ऐसा प्रतीत होता है कि प्रकृति स्वयं इस समयकाल पर नवरात्री के उत्सव के लिए तैयार रहती है, तभी तो उस समय मौसम ना अधिक गर्म होता है और ना अधिक ठंढा।

आध्यात्मिक कारण:
अगर एक साल में दो नवरात्र मनाने के पीछे के आध्यात्मिक पहलु पर प्रकाश डाले तो जहा एक नवरात्रि चैत्र में गर्मी कि शुरुआत में आती है तो वही दूसरी सर्दी के प्रारम्भ में आती है, ऐसे मौसम में आने वाली सौर ऊर्जा हमें सबसे ज्यादा प्रभावित करती है, जिसका असर फसलों के पकने के रूप में भी देखा जा सकता है।

मनुष्य को वर्षा, जल और ठंढ से रहत मिलती है, ऐसे जीवनोपयोगी कार्य पूर्ण होने के कारण दैवीय शक्तियों कि आराधना करने के लिए ये समय सबसे उपयुक्त माना जाता है।

पौराणिक कारण:
माना जाता है कि पहले नवरात्र सिर्फ चैत्र महीने में ही मनाया जाता था, जो कि ग्रीष्मकाल के प्रारम्भ से पहले मनाया जाता था लेकिन ऐसी मान्यता है कि जब श्रीराम ने लंका विजय के बाद माँ का आशीर्वाद लेना चाहा लेकिन वो चैत्र नवरात्रि तक प्रतीक्षा नहीं करना चाहते थे, इसलिए उन्होंने एक विशाल दुर्गा पूजा का आयोजन किया और उसके बाद से ही नवरात्रि का पर्व दो बार चलाने का प्रचलन प्रारंम्भ हुआ।

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।।जय महाकाल।।

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