जानिये महिषासुर वध में क्या था भगवान गणेश का योगदान

एक बार माता पार्वती की एक छोटी सी गलती से रुष्ट होकर भगवान शंकर ने उन्हें प्रायश्चित रूप में ऋषि कात्यायन के यहाँ जन्म लेने का आदेश दे दिया, उसी समय महिषासुर ने भगवान् ब्रम्हा से ये वरदान प्राप्त कर लिया की वो किसी भी नर से हार नहीं सकता, उसके बादउसने चारो तरफ उत्पात मचाना शुरू कर दिया और इंद्रलोक पर अपना कब्ज़ा जमा लिया, उसने साड़ी देवियो को बंदी बना लिया और देवताओ को इंद्रलोक से भगा दिया।

महिषासुर से हारे हुए देवता भगवान भोले नाथ की शरण में गए, लेकिन ब्रम्हा जी के वरदान के कारण महादेव भी उस असुर का कुछ बिगाड़ नहीं सकते थे, जब सारे देवता इन्ही मंत्रणाओं में व्यस्त थे उसी समय प्रथम पूज्य श्री गणेश जी ने सारी देवियो को महिषासुर से छुड़ाने की जुगत लगाई और उन्हें महिषासुर के चंगुल से बाहर निकाल लाये, देवताओ को जब कोई उपाय नहीं सूझ रहा था उसी समय भगवान गणेश ने देवताओ से कहा की ब्रम्हाजी ने महिषासुर को पुरुषो से अविजित रहने का वरदान दिया है लेकिन स्त्रियों से वो अविजित नहीं रह सकता।

गणेश जी के ऐसा कहने पर सारे देवता त्रिदेवो के साथ ऋषि कात्यायन के आश्रम में गए और माँ कात्यायनी की आराधना की, माँ ने उनकी स्तुति से प्रसन्न हो कर महिषासुर का वध करने का वचन देवताओ को दिया और महिषासुर वध के बाद माँ महिषासुर मर्दिनी के नाम से प्रसिद्द हुई।

देवताओ को ज्ञान देकर प्रथम पूज्य श्री गणेश ने महिषासुर वध में अपना योगदान दिया और देवताओ को उस राक्षस से मुक्ति दिलाई।

यदि आपके पास भी कुछ ऐसी ही दिलचस्प, अनसुनी कहानियां हैं तो हमसे ईमेल id jaymahakaal01@gmail.com पर शेयर कीजिये, यदि हमें आपकी कहानी पसंद आई तो हम इसे अपनी वेबसाइट पर आपके नाम के साथ पब्लिश करेंगे।

जय महाकाल

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

*

code