पारद शिवलिंग – महत्व,पहचान,और लाभ

महत्व

पारद एक तरह की धातु है जो ठोस होकर भी द्रव्य रूप में रहती है, इसे रसराज कहा जाता है। यदि इस पारे की धातु से कोई शिवलिंग का निर्माण किया जाता है तो उसे पारद शिवलिंग कहा जाता है, पारे को शुद्ध करके विशेष प्रक्रियाओं द्वारा ठोस रूप देकर शिवलिंग का निर्माण किया जाता है। शास्त्रों के अनुसार पारद शिवलिंग में साक्षात् शिव का वास होता है, शिवलिंग के मात्र दर्शन ही सौभाग्यशाली होता है, इसके लिए किसी प्राण प्रतिष्ठा की आवश्यकता नहीं होती है। ऐसे पारद शिवलिंग को आप केवल बिना पूजा के अपने घर में रख सकते है, यदि आप चाहें तो इसकी पूजा कर सकते है, किन्तु यदि अभिषेक करना हो तो उसके बाद इस शिवलिंग को पूजा के बाद घर से बाहर कम से कम चालीस हाथ की दूरी पर होना चाहिए, अन्यथा इसके विकिरण का दुष्प्रभाव समूचे घर परिवार को प्रभावित करेगा। यदि रोज ही नियमित रूप से अभिषेक करना हो तो इसे घर में स्थायी रूप से रखा जा सकता है, ऐसा करने वाला व्यक्ति बहुत बड़े तपोनिष्ठ उद्भात्त विद्वान होते है, यह साधारण जन के लिए संभव नहीं है, अतः यदि घर में रखना हो तो उसका अभिषेक न करने में ही भलाई है।

पारद शिवलिंग की पहचान
पारद शिव लिंग का निर्माण क्रमशः तीन मुख्या धातुओ के रासायनिक संयोग से होता है. “अथर्वन महाभाष्य में लिखा है .

“द्रत्यान्शु परिपाकेनलाब्धो यत त्रीतियाँशतः. पारदम तत्द्वाविन्शत कज्जलमभिमज्जयेत. उत्प्लावितम जरायोगम क्वाथाना दृष्टोचक्षुषः तदेव पारदम शिवलिंगम पूजार्थं प्रति गृह्यताम.

अर्थात अपनी सामर्थ्य के अनुसार कम से कम कज्जल का बीस गुना पारद एवं मनिफेन (Magnesium) के चालीस गुना पारद, लिंग निर्माण के लिए परम आवश्यक है. इस प्रकार कम से कम सत्तर प्रतिशत पारा, पंद्रह प्रतिशत मणि फेन या मेगनीसियम तथा दस प्रतिशत कज्जल या कार्बन तथा पांच प्रतिशत अंगमेवा या पोटैसियम कार्बोनेट होना चाहिए. पारद शिवलिंग का निर्माण क्रमश तीन मुख्य धातुओं के रासायनिक संयोग से होता है, इसका निर्माण एक विशेष विधि द्वारा विशेष मुहूर्तो में विद्वानों द्वारा किया जाता है। इसकी सत्यता की पहचान निचे दिए गए तरीको से की जा सकती है –
१. सबसे अच्छी विधि है की यदि आप पारद शिवलिंग का संपर्क सोने से करवाए और सोने की मात्रा काम होने लगे तो शिवलिंग शुद्ध पारद है। सोना काम हो जाता है पर पारद शिवलिंग के वजन में तनिक भी बढ़ोतरी तनिक भी बढ़ोतरी नहीं होती।
२. अगर पारद शिवलिंग को हथेली पर घिसा जाए तो काली लाजिर नहीं पड़नी चाहिए, हथेली पे कालिख नहीं आणि चाहिए।
३. जब पारद शिवलिंग को जल में रख कर धुप में रखा जाता है तो कुछ समय बाद पारद शिवलिंग पर शुद्ध स्वर्ण जैसी आभा आ जाती है।
४. अगर लैब में टेस्ट करवाने पर टेस्ट रिपोर्ट में जिंक, लीड, और टिन ये धातुएं आ जाए तो पारद शिवलिंग नाली और दोषयुक्त होता है, क्योंकि रसशास्त्र में इन धातुओं को पारद के दोष कहा गया है।

महत्व

पारद एक तरह की धातु है जो ठोस होकर भी द्रव्य रूप में रहती है, इसे रसराज कहा जाता है। यदि इस पारे की धातु से कोई शिवलिंग का निर्माण किया जाता है तो उसे पारद शिवलिंग कहा जाता है, पारे को शुद्ध करके विशेष प्रक्रियाओं द्वारा ठोस रूप देकर शिवलिंग का निर्माण किया जाता है। शास्त्रों के अनुसार पारद शिवलिंग में साक्षात् शिव का वास होता है, शिवलिंग के मात्र दर्शन ही सौभाग्यशाली होता है, इसके लिए किसी प्राण प्रतिष्ठा की आवश्यकता नहीं होती है। ऐसे पारद शिवलिंग को आप केवल बिना पूजा के अपने घर में रख सकते है, यदि आप चाहें तो इसकी पूजा कर सकते है, किन्तु यदि अभिषेक करना हो तो उसके बाद इस शिवलिंग को पूजा के बाद घर से बाहर कम से कम चालीस हाथ की दूरी पर होना चाहिए, अन्यथा इसके विकिरण का दुष्प्रभाव समूचे घर परिवार को प्रभावित करेगा। यदि रोज ही नियमित रूप से अभिषेक करना हो तो इसे घर में स्थायी रूप से रखा जा सकता है, ऐसा करने वाला व्यक्ति बहुत बड़े तपोनिष्ठ उद्भात्त विद्वान होते है, यह साधारण जन के लिए संभव नहीं है, अतः यदि घर में रखना हो तो उसका अभिषेक न करने में ही भलाई है।

लाभ :
१. घर में पारदेश्वर शिवलिंग की नियमित आराधना करने से समस्त रोग-दोष आदि का नाश होता है, यह ध्यान रखने योग्य बात ये है की पारद शिवलिंग के साथ शिव परिवार की स्थापना और पूजा भी जरुरी है।
२. ऐसा माना जाता है की चारो धामों में स्नान, स्वर्ण दान और विभिन्न धर्मो कर्मो का पुण्य फल पारद शिवलिंग के दर्शन मात्र से मिल जाता है।
३. ऐसा माना जाता है की पारद शिवलिंग की नियमित पूआ करने से इंसान को मोक्ष की प्राप्ति भी हो जाती है।
४. आपको जीवन में कष्टों से मुक्ति नहीं मिल रही हो और हर तरफ से निराश हो तो पारद शिवलिंग की यथाविधि शिव परिवार के साथ पूजा करे, ऐसा करने से आपकी समस्त परेशानिया ख़त्म हो जाएंगी और बड़ी से बड़ी बीमारियों से मुक्ति मिल जायेगी।
५. अगर आपको धन सम्पदा की कमी रहती है तो पारे के बने लक्ष्मी और गणपति को पूजा स्थान में स्थापित करना चाहिए, ऐसा माना जाता है कि जहाँ पारे का वास् होता है वहां माँ लक्ष्मी का भी स्थाई वास रहता है।
६. अगर आपके घर में हमेशा गृह क्लेश रहता हो, घर के सदस्यों में टकराव और वैचारिक मतभेद रहता है तो ऐसी दशा में पारद शिवलिंग को एक कटोरी में जल डाल कर घर के मध्य भाग में रख दे और उस जल को रोज बाहर किसी वृक्ष या गमले में डाल दें।

पारे के शिवलिंग के पूजन की महिमा तो ऐसी है कि उसे बाणलिंग से भी उत्तम माना गया है। जीवन की समस्त समस्याओं के निदान के लिए पारद के उपयोग एवं इससे सम्बंधित उपाय अत्यंत प्रभावशाली हैं। यदि इनका आप यथाविधि अभिषेक कर, पूर्ण श्रद्धा से पूजन करेंगे तो जीवन में सुख और शान्ति अवश्य पाएंगे।

अपने अगले लेख में हम जानेंगे कि क्या है पारद शिवलिंग कि पूजा विधि, यदि पारद शिवलिंग से सम्बंधित आपके कोई सवाल हो तो आप हमसे संपर्क कर सकते है, आप पारद शिवलिंग प्राप्त करने हेतु भी हमसे संपर्क कर सकते है।

महाकाल कि कृपा आप पर सदैव बानी रहे।

जय महाकाल

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

*

code