क्या अन्धविश्वास है तंत्र मंत्र?

hindutva

क्या अन्धविश्वास है तंत्र मंत्र?

जैसे ही कोई व्यक्ति किसी तंत्रवेत्ता के सम्पर्क मे आता है तो साधारणतः अधिकतर व्यक्तियों की समझ या सोच होती है कि मैं तंत्र मंत्र के मार्ग पर प्रविष्ट हो गया हुं और मेरा तो अब एक अच्छे गुरु जी से भी संपर्क हो गया है और गुरु जी की कृपा भी मुझ पर है ही अतः अब तो सारी सिद्धियां मेरे बांए हाथ की मुट्ठी में होंगी, बहुत सारी लक्ष्मी की प्राप्ति होगी, मैं अपने शत्रुओं को चुटकी बजाते ही परास्त कर दुंगा मेरे सब शत्रु परास्त होंगे मैं उनको जैसा चाहूं वैसा दंड भी दे दुंगा।

परंतु क्या यह सब कुछ होता है जवाब है अधिकतर नहीं कभी किसी ने सोचा ही नहीं कि एसा हुआ क्यों नहीं। ऐसा सर्वत्र सम्भव नहीं होता है क्योंकी आपके *कर्म* हमेशा से हर काम में आडे आते हैं चाहे अच्छे हों या फिर बुरे सबका कर्म फल तो अपने आप को ही भोगना पड़ता है ।

और एक अच्छे गुरु जी हमेशा ही आपको आपके कर्म संस्कार के भोगवाद में विश्वास रखते हैं। क्योंकि वे जानते हैं कि किसी के कर्म संस्कार में परिवर्तन करने का अधिकार केवल ऊपर वाले को ही है प्रकृति के कार्य में दखल देना नहीं चाहिए।

प्रकृति या इष्ट की इच्छा है की आपको भोगना है तो उस नतीजे को आपको भोगना ही पड़ेगा । लेकिन अपने इष्ट पर श्रद्धा या अश्रद्धा का भाव प्रकट नहीं करना चाहिए ।।

यदी आपके गुरु जी आप को मोक्ष मार्ग की ओर ले जाने की करते हैं तो आपको कर्म भोग भोगना ही पड़ेगा । सकाम प्रयोगों से इच्छा प्राप्ती तो होगी परन्तु मोक्ष मार्ग हमेशा दूर ही रहेगा।।

यह तो हुइ आधे से ज्यादा लोगों के लिए बेफिजुल की बकवास और कुछ लोगों को इस पोस्ट को पढ़ कर आनन्द आ रहा होगा।

अब पुनः प्रश्न यह उठता है कि जब कोई व्यक्ति दुःखी होता है तभी तो वह किसी साधू-सन्यासियों ,संतों ,या किसी आपके जैसे सिद्ध पुरुषों की तलाश करता है और वह इच्छा करता है की यदि आप जैसा कोई केवल एक बार मुझे इस संकट से मुक्ति दिला दे फिर बाद में मैं भी निस्काम भाव से सेवा कर्म करने लगुंगा और इस सोच में बुराइ भी नहीं है ।।

अब शुरू हो जाता है एक अच्छे गुरु को ढुंढने का सिलसिला और इसी में साथ देते हैं आपके / उस व्यक्ती के कर्म फल।

अब जिनके कर्म अच्छे रहे होंगे उनको आप जैसे कुछ समझदार व अच्छे व्यक्तियों से मिलान हो जाएगा
और जिन्होंने कुछ ज्यादा ही अच्छे करम कीये होंगे उनका संपर्क व्हाट्स एप के फर्जी अघोरियों से हो जाएगा और फिर दोष दीया जाएगा की तंत्र मंत्र बेकार की बातें हैं कुछ नहीं होता है इनसे।

जबकि अपने आप की कमी या अपने आप के अन्दर झांक कर कोई देखता ही नहीं है कि परेशानी की जड़ कहां से आ रही है ।।

और इसी कारण से फर्जी बाबाओं की चल पडी है। और लोग इन तथाकथित अघोरियों से डर भी जाते है कि कहीं अघोरी बाबाजी हमार कुछ अहित ना कर दें। और कई बार तो यहां तक सुनने में आया है कि कई बहनो ने अपनी इज्जत तक इनके चक्कर में उलझ कर गंवा दी है किसी से कहने लायक भी नहीं रही हैं ।।

तो भक्तों हम सिर्फ इतना सा कहना चाहते हैं कि होनी प्रबल है यदि किसी व्यक्ति के कर्म विशेष कमजोर हों और होनी प्रबल हो तो कुछ भी हो सकता है आपके अटके काम मिनटों में सुलट सकते हैं और यदि आपके कर्म कितने ही अच्छे हों और होनी प्रबल नहीं है तो फिर चाहे कुछ भी कर लेंगे परिणाम ही रहेगा। सकाम प्रयोगों का फल शिध्र नहीं मिल पाएगा । हो सकता है प्रकृति बीच बीच में सहारा लगा दे ।

कठिनाइयां मनुष्य को हमेशा निर्मल करती रही है। पृथ्वीपर एक से एक सिद्ध पुरुष हैं।

हमे तब तक ज्ञान नहीं होता जब तक की हमसे ऊपर का कोई मिल नहीं जाता। जैसे कि ऊंट को अपनी ऊंचाई की वास्तविकता का अहसास तभी होता है जब वह किसी पहाड के नीचे जा कर खडा होता है। इस लिए हमें भी तभी अपनी परिस्थिति का ज्ञान होता है जब कोई हमसे बेहतर हमारे संपर्क में आता है। तो भक्तों कृपया तंत्र मंत्र के बारे में सही व उचित-अनुचित क्या है एसी पूरी जानकारी रखें और दूसरों को भटकने से बचावें अपना व अपनो का खयाल रखें जहां तक हो सके फर्जी बाबाओं से बचने की कोशिश करें उनके झूंठे दिलासे या झांसे में ना आवें आपकी जिंदगी को ऐसे ही किसी के भरोसे ना छोड दें बहुत ही सोचसमझ कर ही फैंसला लें आपकी सावधानी ही आपको बचा सकती है दूसरा कोई नहीं।

कुछ लोगों के मुंह पर एक तमाचा और कुछ लोगों के लिए एक नसीहत …. माने ना माने आपकी अपनी मरजी

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