कैसे करें शिवरात्रि पूजन?

शिवरात्रि निर्णय:—
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मित्रो हर बार की तरह इस बार भी शिवरात्रि का पर्व किस दिन मनाया जाए इस बात को लेकर तमाम तरह की भ्रांतियां और संशय बने हुए है, इसलिए शिवरात्रि किस दिन मनाए इस बारे में आपको अवगत कराने का हमारा प्रयास है।

१.”इदं व्रतं रविवारभौमवारयोगे शिवयोगयोगे चातिशस्तम्”

२.दिनद्वये अपि अर्द्ध रात्र अव्याप्ति अभावे अपि परैव।

इस वर्ष की महाशिवरात्रि निर्णय में उक्त दो मुख्य नियम मान्य है, क्योंकि कई पंचांगों में यह पर्व 13 फरवरी को तथा कुछ पंचांगो में 14 फरवरी को दिया हुआ है, अतः न केवल आम लोग बल्कि पण्डित जन भी भ्रमित हैं, अतः इसका स्पष्टीकरण शास्त्र शुद्धि से निवेदन कर रहा हूँ!

मुख्य नियमानुसार तो शिवरात्रि की शास्त्रशुद्धि 14 फरवरी में ही घटित हो रही है किंतु इस व्रत में रवि या मंगलवार हो जाए तो यह उत्कृष्ट “शिवयोग” बन जाता है।

चूंकि शिवयोग निर्णीत वेला में न होकर उससे पूर्व अनिर्णीत वेला में घटित हो रहा है, अर्थात 13 तारीख की अर्द्धरात्रि व्याप्त चतुर्दशी में

“मंगलवार” (शिवयोग) घटित है अतः अनिर्णीत काल में भी शिवयोग घटित होने से अधिकांश पंचांगकारों ने 13 फरवरी को ही शिवरात्रि पर्व स्वीकार किया है जो कि सम्यक् है!

जो गृहस्थ साधक भगवान शिव की रात्रि काल में चार प्रहर पूजा अभिषेक करते हैं उन्हें 13 फरवरी को शिवरात्रि उत्सव मानना शास्त्र सम्मत है

जो मात्र प्रातः एक ही बार पूजन अभिषेक करके व्रत करके सांयकाल में व्रत पूर्ण कर देते हैं वह 14 तारीख को शिव रात्रि महोत्सव मनाएं उचित रहेगा

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जय महाकाल।।

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