क्या है माला का रहस्य?

क्या है माला का रहस्य?

सबसे श्रेष्ठ माला वर्णमाला है; जिसे शिव्सार (अनुस्वार) से संयुक्त करके शक्ति बीजों की उत्पत्ति होती है। इसके बाद महा शंख और इसके बाद स्फटिक की माला श्रेष्ठ समझी जाती है। रुद्राक्ष की माला सभी कर्मों में प्रशस्त है। मूंगा, हीरा, मणि की माला पुष्टि (चिकित्सा) एवं वशीकरण में उपयुक्त मानी जाती है। विद्वेषण- उच्चाटन में स्फटिक एवं घोड़े के दांतों की माला श्रेष्ठ मानी जाती है। धर्म-कर्म –मोक्ष और कल्याण के विषय में शंख की माला श्रेष्ठ होती है।

कामनाओं की पूर्ती में कमल बीज कि माला प्रशस्त होती है। स्फटिक , मोती, मूंगा, माणिक्य, रुद्राक्ष, पुत्र जीव की माला विद्या की प्राप्ति के लिए श्रेष्ठ है। हल्दी की माला धन एवं कामनापूर्ति और आरोग्यता के लिए श्रेष्ठ है। सफेद मदार एवं काले धतूरे की जड़ की माला जादू-टोन अभिचार कर्मों से रक्षा करती है। काले-सफ़ेद पत्थर की मला केतु प्रधान व्यक्तियों के लिए लाभ कारी होती है। हल्दी की मला भाग्य दोष का हरण करती है।

इस प्रकार माला अनेक प्रकार की होती है। यदि वह उचित प्रकार से बना, विधिवत् गूंथा और सम्बन्धित मन्त्र से सिद्ध किया हुआ है; तो पहनने मात्र से चमत्कारी लाभ होता है।

जप माला –

विषय के अनुसार माला किस चीज कि हो; यह निर्णित किया जाता है। रुद्राक्ष की माला हर विषय के लिए प्रशस्त है।

माला के दानों की संख्या –

पच्चीस दानों की माला मोक्ष और सन्यास हेतु; 27 दानों की माला अभिचार कर्म में, धन के लिए 30 दानों की माला और शक्ति (देवी) के मन्त्रों कि सिद्धि 50 दानों की माला पर की जाती है। 108 दानों की माला सभी कार्यों हेतु प्रशस्त मानी जाती है।

जप के नियम अलग होते है; पर पहनने से उचित माला धारण करने से चमत्कार होता है। यह रत्न और अंगूठी से कई गुणा अधिक शक्तिशाली होता है। सोने , चांदी, मोती, मूंगा आदि की भी मालाएं धारण की जाती है और हल्दी, पद्मबीज , मदार, कटहल की जड़, अपामार्ग की जड़, धतूरे की जड़, शम्मी की जड़ आदि की भी मालाएं धारण की जाती है। माला का ग्रंथन विधिवत होना चाहिए। उसका शुद्धिकरण करके न्यूनतम 1100 मन्त्रों से सिद्ध करना चाहिए। मंत्र उस माला की वास्तु के अनुसार होते है।

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।।जय महाकाल।।

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