धर्म का हो रहा व्यापार

वक़्त बहुत तेज़ी से बदल रहा है। पहले आध्यात्म का अर्थ था अपना और समाज का कल्याण, प्रभु तक पहुचने का मार्ग, किन्तु कुछ लोगो ने आध्यात्म का मतलब ही बदल दिया,उनकी नज़र में अध्यात्म का अर्थ है भगवान का भय दिखा कर धन कमाना। धन बिना धर्म नही ये सत्य है। पूजा, यज्ञ, जप आदि में धन लगता ही है, सेवा के हिसाब से अपने परिवार के पालन हेतु धन लेना गलत नही,किन्तु भय दिखा कर अनर्थ बता कर धन लेना तो लूट के समान है। इन्ही लोगो की वजह से आज लोग धर्म-भगवान से दूर हो रहे है, नास्तिक बन रहे है। तंत्र-मंत्र कोई वस्तु नही जिसका क्रय-विक्रय हो । आध्यात्म को सेवा ही रहने दो व्यापार मत बनाओ ।

11-21 दिन में कोई तंत्र नही सिखा सकता। वर्षो लग जाते है प्रथम सीढ़ी चढ़ने में। ऐसे लोगो से सावधान रहने की आवश्यकता है, वरना वो दिन दूर नही जब लोगो का भगवान से विश्वास उठ जाएगा। कुछ लोग इन्ही चीजो का फायदा उठा कर सनातन को बदनाम कर रहे है ।

रोज नए पंथ जन्म ले रहे है। भगवान को गाली देना तो फैशन बनता जा रहा है। इसलिए सभी लोगो को जागरूक होने की ज़रूरत है। यदि कोई भी व्यक्ति धर्म के विरुद्ध कार्य करे तो उसके खिलाफ आवाज़ उठाने को तैयार रहना होगा ।

कुछ बाबाओ की वजह से सम्पूर्ण संत समाज को शक की दृष्टि से देखा जाने लगा है। फ़र्ज़ी तांत्रिको की वजह से, तंत्र से लोगो का विश्वास खत्म हो रहा है। आज समाज को तोड़ने के लिए सनातनियो को जातियो में बाटा जा रहा है ।
यदि समय रहते नही जागे तो फिर शायद कभी जागने का मौका ही ना मिले। गीता में श्री कृष्ण ने भी यही कहा है, मैं ही धर्म हूँ और मैं उनके साथ हूँ जो सत्यनिष्ठ और कर्म-पुरुष है ।

जाती से ऊपर मानव जन्म और धन से उपर सनातन धर्म ।।

घबराने से निशा का अंधेरा खत्म नही होता।

हिम्मत करके एक दिया जला अंधेरा खुद भाग जाएगा ।।

शिवगोरक्ष कल्याण करे ।
शिवशक्ति भक्ति, शक्ति, मुक्ति, सद्बुद्धि दे ।

भैरव उस्ताद सदा सहाय

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