Month: March 2020

नवरात्रि के आठवें दिन पूजी जाती हैं माँ महागौरी, जानिए महत्व

माँ महागौरी नौदुर्गा की आठवीं शक्ति मानी गईं है, इनके पूजन से साधक को जीवन के सच्चे अर्थो का पता चलता है और जीवन जीने की सही राह प्राप्त होती है।

Continue Reading

Ramayan and Mahabharata: Let’s Revive | Jay Mahakaal

On huge demand Doordarshan is re-running its 2 of the popular mythological shows, ‘RAMAYAN’ and ‘MAHABHARATA’.

Continue Reading

नवरात्रि के सातवें दिन पूजी जाती हैं माँ कालरात्रि, जानिए महत्व।

उत्पत्ति कथा:
माँ की उत्पत्ति की कथा दुर्गा सप्तशती में वर्णित है, जब शुम्भ और निशुम्भ ने सारी पृथ्वी पर हाहाकार मचा रखा था, तब सारे देवता उससे बचाने की प्रार्थना लेकर देवाधिदेव शंकर के पास गए, उनकी करूँ पुकार सुनकर भगवान् शिव ने माता पारवती से भक्तो की रक्षा हेतु अनुरोध किया। उनकी बात मान कर माँ ने दुर्गा रूप धारण किया और शुम्भ-निशुम्भ का वध करने के लिए तत्त्पर हुई, ऐसे में उस सेना में रक्तबीज नमक एक राक्षस था, जिसे ये वरदान प्राप्त था की उसके शरीर से अगर रक्त की बूंदे गिरती है तो उससे उसी के समान दैत्य उत्प्पन हो जाएंगे, माँ दुर्गा ने जैसे ही उसके ऊपर प्रहार किया उसके शरीर से रक्त गिरने के कारण सैकड़ो दैत्य उत्पन्न हो गए, ऐसा देख कर माँ ने अपने तेज़ से माँ कालरात्रि को उत्पन्न किया। इसके बाद जब माँ दुर्गा ने रक्तबीज पर प्रहार किया तो माँ कालरात्रि ने उस रक्त को ज़मीन पर गिरने से पहले ही अपने मुख में भर लिया|

ऐसा करने से रक्तबीज के रक्त से और असुर उत्पन्न ना हो पाए और माँ ने रक्तबीज का वध कर दिया। माँ काल रात्रि की उत्पत्ति के समय उनका रूप बहुत ही विकराल था, ऐसा प्रतीत होता था जैसे वो काल को भी हर सकती है, इसलिए उनका नाम कालरात्रि पड़ा। माँ के इस स्वरुप में उनके चार हाथो का वर्णन मिलता है, दाहिने हिस्से में ऊपर का हाथ वर मुद्रा में है और नीचे का हाथ अभय मुद्रा में है जो की साधको को निर्भय बनाता है। बाए हिस्से में ऊपर के हाथ में कटार तथा नीचे के हाथ में कांटेनुमा अस्त्र धारण किए हुए है। माँ के तीन नेत्र और स्वरुप विकराल है। इनकी नासिकाओं से स्वांसो के साथ भयंकर ज्वालायें निकल रही है। इनका वाहन गर्दभ अर्थात गधा है।

पूजन फल: माँ कालरात्रि की आराधना से व्यक्ति के जीवन में दुःख, रोग, शोक, प्रतीक भय इत्यादि दूर होते है। माँ के कृपापात्र के लिए इस संसार में कुछ भी दुर्लभ नहीं रहता है, उसके परोक्ष और प्रत्यक्ष शत्रुओ का विनाश होता है।

माँ कालरात्रि के मन्त्र:

बीज मन्त्र: क्लीं ऐं श्री कालिकायै नम:

ध्यान मंत्र:
करालवंदना धोरां मुक्तकेशी चतुर्भुजाम्। कालरात्रिं करालिंका दिव्यां विद्युतमाला विभूषिताम॥
दिव्यं लौहवज्र खड्ग वामोघोर्ध्व कराम्बुजाम्। अभयं वरदां चैव दक्षिणोध्वाघः पार्णिकाम् मम॥
महामेघ प्रभां श्यामां तक्षा चैव गर्दभारूढ़ा। घोरदंश कारालास्यां पीनोन्नत पयोधराम्॥
सुख पप्रसन्न वदना स्मेरान्न सरोरूहाम्। एवं सचियन्तयेत् कालरात्रिं सर्वकाम् समृध्दिदाम्॥

स्तोत्र पाठ:
हीं कालरात्रि श्री कराली च क्लीं कल्याणी कलावती। कालमाता कलिदर्पध्नी कमदीश कुपान्विता॥
कामबीजजपान्दा कमबीजस्वरूपिणी। कुमतिघ्नी कुलीनर्तिनाशिनी कुल कामिनी॥
क्लीं हीं श्रीं मन्त्र्वर्णेन कालकण्टकघातिनी। कृपामयी कृपाधारा कृपापारा कृपागमा॥

माँ कालरात्रि का कुण्डलिनी से सम्बन्ध: जो साधक कुण्डलिनी जागरण करना चाहते हो उनके लिए माँ कालरात्रि का ध्यान, स्तोत्र और कवच के जाप करने से सहस्रारचक्र जाग्रत होता है। सातवे दिन सहस्रार चक्र के भेदन करने का प्रयास करें, माँ कालरात्रि सहस्रार चक्र की अधिष्ठात्री देवी है। सहस्रार चक्र में एक शक्ति पायी जाती है जिसको मेधा शक्ति के नाम से जाना जाता है। यह शक्ति स्मरण शक्ति, एकाग्रता और बुद्धि को प्रभावित करती है।

माँ कालरात्रि का प्रसाद: सप्तमी तिथि के दिन भगवती की पूजा में गुड़ का नैवेद्य अर्पित करके ब्राह्मण को दे देना चाहिए। ऐसा करने से व्यक्ति शोकमुक्त होता है।

माँ कालरात्रि का सम्बन्ध हमारी कुण्डलिनी के सहस्रार चक्र से होता है अतः इनकी कृपा के लिए १ मुखी रुद्राक्ष धारण किया जा सकता है। बिल्लौर (Amethyst), या स्पष्ट बिल्लौर (Clear Quartz ) धारण करने से भी माँ की कृपा प्राप्त होती है।

यदि आपको हमारा आर्टिकल पसंद आया हो या आपकी कोई उलझन, सवाल या सलाह हो तो आप नीचे दिए गए कमेंट बॉक्स में अपनी राय छोड़ सकते हैं। ओरिजिनल रत्न, रुद्राक्ष, क्रिस्टल, कुंडली खरीदने हेतु या रेकी और कुंडली से जुड़े प्रश्नो के लिए आप हमसे संपर्क कर सकते है।

ऐसे ही अपडेट्स प्राप्त करने हेतु आप हमारे फेसबुक, इंस्टाग्राम, ट्विटर पर जुड़ सकते है, हमारा हैंडल है @jaymahakaal01।

आप हमसे व्हाट्सअप के माध्यम से भी जुड़ सकते है, +91 – 91 52 20 3064 पर

The astrological analysis behind Modi’s 21 day lockdown

in India coronavirus transmission from person to person will start reducing from 29th March, 2020 7:02 pm.

Continue Reading

नवरात्रि के छठे दिन पूजी जाती हैं माँ कात्यायनी, जानिए महत्व।

महर्षि कात्यायन के यहाँ जन्म लेने के कारण या महर्षि कात्यायन ने उन्हें अपनी पुत्री माना इस कारण उनका नाम कात्यायनी पड़ा।

Continue Reading

नवरात्रि के पांचवे दिन पूजी जाती हैं माँ स्कंदमाता, जानिए महत्व।

यदि किसी दंपत्ति को संतान प्राप्ति में समस्या उत्प्पन हो रही है या संतान सुख से वंचित है ऐसे दंपत्ति को माँ स्कंदमाता की पूजा से विशेष लाभ की प्राप्ति होती है।

Continue Reading

नवरात्रि के चौथे दिन पूजी जाती हैं माँ कुष्मांडा, जानिए महत्व

ऐसी मान्यता है की इस विश्व के भरण पोषण के लिए भगवान सूर्य की आवश्यकता थी, इस जरुरत को देखते हुए माँ ने स्वयं को सूर्य के बिच में स्थापित कर सूर्य को ऊर्जा और रौशनी प्रदान की।

Continue Reading

नवरात्रि के तीसरे दिन पूजी जाती हैं माँ चंद्रघंटा, जानिए महत्व।

इनकी उपासना करने से साधक को सिंह का पराक्रम और निर्भयता प्राप्त होती है। इनके घंटे की ध्वनि सदा अपने भक्तो की भूतो एवं प्रेतबाधा से रक्षा करती है। इनके उपासको को देख कर शान्ति और सुख का अनुभव करते है।

Continue Reading

Quick recipe to make during your coronavirus self-quarantine.

Self-quarantine has given us all the time we need to catch up with ourselves and our loved ones.

Continue Reading

नवरात्रि के दूसरे दिन पूजी जाती हैं माँ ब्रह्मचारिणी, जानिए महत्व।

ब्रम्ह का मतलब होता है तपस्या और चारिणी अर्थात आचरण करना, मान्यता के अनुसार माँ ने भगवान् शिव को पति रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की, यही वजह है की उनका नाम ब्रम्ह्चारिणी पड़ा।

Continue Reading