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Month: January 2018

क्यों चढ़ता है शिव को बेल पत्र?

तीन पत्तों वाला बिल्व पत्र ही शिव पूजन में उपयुक्त माना गया है।

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ग्रहण काल में क्या करें क्या ना करें?

भूकंप एवं ग्रहण काल में पृथ्वी को खोदना नही चाहिए

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क्यों गर्भवती महिला को रहना होता है सतर्क ग्रहण से?

ग्रहण काल में कोई भी कार्य आरंभ न करें

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क्यों प्रिय है शिव को भांग-धतूरा?

ऐसा माना जाता है कि भगवान को भांग-धतूरा चढ़ाने से वे प्रसन्न होते हैं। 

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पारद शिवलिंग – महत्व,पहचान,और लाभ

पारद एक तरह की धातु है जो ठोस होकर भी द्रव्य रूप में रहती है, इसे रसराज कहा जाता है। यदि इस पारे की धातु से कोई शिवलिंग का निर्माण किया जाता है तो उसे पारद शिवलिंग कहा जाता है, पारे को शुद्ध करके विशेष प्रक्रियाओं द्वारा ठोस रूप देकर शिवलिंग का निर्माण किया जाता है।

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शिव ने लिए कई अवतार, जानिये क्या है उनका आधार – भाग २

अर्थात अश्वत्थामा, राजा बलि, व्यासजी, हनुमानजी, विभीषण, कृपाचार्य, परशुराम व ऋषि मार्कण्डेय ये आठों अमर हैं। शिवमहापुराण(शतरुद्रसंहिता-37) के अनुसार अश्वत्थामा आज भी जीवित हैं और वे गंगा के किनारे निवास करते हैं।

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क्यों लटका है शिव के गले में सर्प?

कुछ लोग डर कर या अपने निजी स्वार्थ के लिए नागों को मार देते हैं 

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कृष्ण और सुदामा का अनमोल रिश्ता।

जहाँ मित्रता हो वहां संदेह नही।

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शिव ने लिए कई अवतार, जानिये क्या है उनका आधार

शिव महापुराण में भैरव को परमात्मा शंकर का पूर्ण रूप बताया गया है। एक बार भगवान शंकर की माया से प्रभावित होकर ब्रह्मा व विष्णु स्वयं को श्रेष्ठ मानने लगे। तब वहां तेज-पुंज के मध्य एक पुरुषाकृति दिखलाई पड़ी। उन्हें देखकर ब्रह्माजी ने कहा- चंद्रशेखर तुम मेरे पुत्र हो। अत: मेरी शरण में आओ। ब्रह्मा की ऐसी बात सुनकर भगवान शंकर को क्रोध आ गया। उन्होंने उस पुरुषाकृति से कहा- काल की भांति शोभित होने के कारण आप साक्षात कालराज हैं। भीषण होने से भैरव हैं। भगवान शंकर से इन वरों को प्राप्त कर कालभैरव ने अपनी अंगुली के नाखून से ब्रह्मा के पांचवें सिर को काट दिया।

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क्यों कहते हैं शिव को श्मशान का राजा?

संसार मोह-माया का प्रतीक है जबकि श्मशान वैराग्य का

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