नवरात्र में माँ के स्वरूप के कुछ पूजा एवं नियम

नवरात्र में माँ के स्वरूप के कुछ पूजा एवं नियम

मां दुर्गा की आराधना को समर्पित नवरात्रि के पहले दिन कलश या घट स्थापना से व्रत का प्रारंभ होता है। नवरात्र के प्रथम दिन कलश स्थापना कर व्रत का संकल्प लेना चाहिए। नवरात्र व्रत की शुरुआत प्रतिपदा तिथि को कलश स्थापना से की जाती है।

नवरात्र के 10 दिन प्रात: और संध्या के समय भगवती दुर्गा की पूजा करनी चाहिए। श्रद्धानुसार अष्टमी या नवमी के दिन हवन और कुमारी पूजा कर भगवती को प्रसन्न करना चाहिए।

नवरात्र में हवन और कन्या पूजन अवश्य करना चाहिए। नारदपुराण के अनुसार हवन और कन्या पूजन के बिना नवरात्र की पूजा अधूरी मानी जाती है। साथ ही नवरात्र में मां दुर्गा की पूजा के लिए लाल रंग के फूलों व रंग का अत्यधिक प्रयोग करना चाहिए। नवरात्र में “श्री दुर्गा सप्तशती” का पाठ करने का प्रयास करना चाहिए।

ऐसी मान्यता है कि आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से माता दुर्गा नौ दिनों के लिए पृथ्वी लोक में वास करती हैं, इसलिए शारदीय नवरात्रि का महत्व बढ़ जाता है। इन दिनों में यदि विधि विधान से माता की आराधना की जाए, तो वह प्रसन्न होंगी और सभी मनोकामनाएं पूरी करेंगी।

नवरात्रि में माता शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा देवी, कुष्मांडा देवी, स्कंदमाता, माता कात्यायनी, मां कालरात्रि , महागौरी और माता सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है। यदि आपने नवरात्रि का व्रत रखने का निर्णय लिया है तो आपके लिए यह जानना जरूरी है कि आपको नवरात्रि की पूजा में किन-किन वस्तुओं का इस्तेमाल करना है।

  1. माता दुर्गा की नई मूर्ति या तस्वीर – यदि पूजा घर में दुर्गा माता की पुरानी तस्वीर या मूर्ति है, तो उसे हटाकर नई तस्वीर स्थापित करनी होगी। यदि माता की मूर्ति मिट्टी की है, तो बहुत अच्छा रहेगा।
  2. माता के लिए नई लाल चुनरी – माता की तस्वीर पर चढ़ाने के लिए नई लाल चुनरी लें। मूर्ति रखी है तो उनके वस्त्रों के साथ लाल चुनरी लें।
  3. चौकी – माता की तस्वीर या मूर्ति स्थापित करने के लिए एक चौकी। उस पर बिछाने के लिए पीला वस्त्र।
  4. नया कलश- घट या कलश स्थापना के लिए एक कलश। कलश में रखने के लिए आम की हरी पत्तियां।
  5. माता की आराधना के लिए दुर्गा सप्तशती, दुर्गा चालीसा और दुर्गा आरती की पुस्तक।
  6. माता को अर्पित करने के लिए लाल सिंदूर और लाल पुष्प- विशेषकर गुड़हल का फूल।
  7. कलश पर रखने के लिए मिट्टी के पात्र, जिसमें जौ के बीज रखे जाएंगे।
  8. अक्षत् के लिए चावल, गंगा जल, चंदन, रोली, शहद और कलावा या मौली।
  9. नारियल, गाय का घी, सुपारी, लौंग, इलायची।
  10. पान का पत्ता, धूप, अगरबत्ती, कपूर।
  11. बैठक कर पूजा करने के लिए एक उपयुक्त आसन।

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