हस्तक्षेत्र में विद्युत् – चुम्बकीय रेखाएँ

स्वतंत्र जीवन, प्रकृति के सारे नियम-विनियम को जानता और समझता हुआ स्वच्छंद कार्य, व्यव्हार और विचरण करता है।


* यही जीवन का सार-तत्व है कि मानव संयमित, संतुष्ट और खुशहाल रहे।
* सभी भाव और कर्म एवं सुख-दुःख के कारक अपनी छवि हस्तरेख में प्राकृतिक रूप से निर्मित करते रहते हैं।


हाल-चाल, विचार-व्यवहार; तन, मन, धन का कारोबार
सभी समय के साथ बदलते, जैसे उपग्रह-ग्रह सब चलते।
यह है हस्तरेख विज्ञान,
जो समझें उनका कल्याण।
जय महाकाल !

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