श्राध पर विशेष- किस दिन क्या करें?

श्राध पर विशेष- किस दिन क्या करें?

महालय श्राद्ध(पितृ पक्ष) तिथ्योल्लेख

दिनांक 14 सितम्बर शनिवार को प्रतिपदा का श्राद्ध।

दिनांक 15 सितम्बर रविवार को द्वितीया का श्राद्ध।

दिनांक 17 सितम्बर मंगलवार को तृतीया का श्राद्ध।

दिनांक 18 सितम्बर बुधवार को चतुर्थी श्राद्ध व भरणी श्राद्ध।

दिनांक 19 सितम्बर गुरुवार को पंचमी श्राद्ध/कुमार पंचमी (अविवाहित मृत) का श्राद्ध।

दिनांक 20 सितम्बर शुक्रवार को षष्ठी का श्राद्ध।

दिनांक 21 सितम्बर शनिवार को सप्तमी का श्राद्ध।

दिनांक 22 सितम्बर रविवार को अष्टमी का श्राद्ध ।

दिनांक 23 सितम्बर सोमवार को नवमी श्राद्ध/मातृ नवमी/ सौभाग्य नवमी का श्राद्ध।

दिनांक 24 सितम्बर मंगलवार को दशमी का श्राद्ध।

दिनांक 25 सितम्बर बुधवार को एकादशी श्राद्ध व द्वादशी का श्राद्ध,सन्यासिनां श्राद्ध।

दिनांक 26 सितम्बर गुरुवार को त्रयोदशी श्राद्ध,मघा का श्राद्ध।

दिनांक 27 सितम्बर शुक्रवार को शस्त्रादि हतानां श्राद्ध।

दिनांक 28 सितम्बर शनिवार को सर्वपितृ अमावस्या श्राद्ध,पूर्णिमा श्राद्ध (गजच्छाया योग )

दिनांक 29 सितम्बर रविवार को मातामह का श्राद्ध(दोहित्रप्रतिपद्)

विशेष– पितृ पक्ष की चतुर्दशी को केवल दुर्मरण(विष-शस्त्रादि) से मृत्यु को प्राप्त हुए का ही श्राद्ध किया जाता है। सामान्य रूप से चतुर्दशी को मृत का श्राद्ध भी पितृ पक्ष की अमावस्या को ही किया जाता है एवं पूर्णिमा का श्राद्ध भी पितृ पक्ष की अमावस्या को ही किया जाता है। क्योंकि भाद्रपद पूर्णिमा को महालय पक्ष की प्राप्ति नही होती है यही शास्त्रोक्त नियम है।

हिन्दू धर्म की परंपराएं कमाल की है। कुछ ऐसी ही परंपरा, रीति एवं रिवाज़ों के आध्यात्मिक एवं वैज्ञानिक कारणों से आप को अवगत करवाने की यह छोटी सी कोशिश।

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