Month: November 2017

आयुर्वेद का इतिहास – किसने शुरुआत की आयुर्वेद की जानते है इस भाग में

ब्रम्हाजी पिताओं के पिता है इसलिये हम लोग इन्हें पितामह कहा करते हैं। कहा जाता है कि संततिपर पितासे भी बढ़कर पितामहका स्नेह होता हैं। ये कहावत अपने पितामह ब्रह्माजी पर ठीक ठीक चरितार्थ होती है। ये अपना स्नेह हमपर अनवरत बरसाते रहते है यदि कभी हम अपने पथ से विचलित होते है तो इनके हृदय को ठेस पहुँचती है और ये किसी न किसी रूप में हमें सावधान कर देते है।

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आयुर्वेद का इतिहास

आयुर्वेद, या आयुर्वेदिक दवाइया, भारतीय सभ्यता के इतिहास से जुडी एक ऐसी चिकित्सा पद्धति है जिसे एक पूरक चिकित्सा के रूप में सदियों से प्रयोग किया जाता रहा है, भूमंडलीकरण या आधुनिकीकरण के दौर में प्रचलित चिकित्सा पद्धतिया एक प्रकार की पूरक चिकित्सा पद्धतिया ही है, पश्चिमी देशो में आयुर्वेद के उपचार और प्रथाओं को सामान्य स्वास्थ्य अनुप्रयोगों में और कुछ मामलों में चिकित्सा उपयोग में एकीकृत किया गया है।

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क्या हैं ध्यान और उसकी विधियाँ

ध्यान की विधियाँ कौन-कौन सी हैं? ध्यान की अनेकानेक एवं अनंत विधियाँ संसार में प्रचलित हैं. साधकों की सुविधा के लिए विभिन्न शास्त्रों व ग्रंथों से प्रमाण लेकर ध्यान की विधियाँ बताते हैं जिनका अभ्यास करके साधक शीघ्रातिशीघ्र ईश्वर साक्षात्कार को प्राप्त कर सकता है.

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क्या है पंच विकार, कैसे मुक्ति मिलेगी उन विकारो से

श्री बाबा हनुमानजी के स्वरूप, चरित्र, आचरण की महिमा ऐसी है कि उनका मात्र नाम ही मनोबल और आत्मविश्वास से भर देता है। रुद्र अवतार होने से हनुमान का स्मरण दु:खों का अंत करने वाला भी माना गया है।

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