१२ मुखी रुद्राक्ष – लाभ, शक्तिया और महत्व

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१२ मुखी रुद्राक्ष – लाभ, शक्तिया और महत्व

बारह मुखी रुद्राक्ष के अधिपति देवता भगवान् सूर्य को माना जाना है। जिस प्रकार सूर्य के बिना जीवन संभव नहीं है, सूर्य की रश्मिया ही हमें सिखाती है कि जो भी है वो आज और अभी है, सूर्य जिस प्रकार हमें यह शिक्षा प्रदान करते है कि समय से बड़ा कुछ भी नहीं है और जो कुछ है वो वर्तमान समय ही है, उसी प्रकार यह रुद्राक्ष हमें यह शक्ति प्रदान करता है कि जो कुछ है अभी है, हमारा वर्तमान ही सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण है।

१२ मुखी रुद्राक्ष हमें आज और अभी का महत्व समझाता है और उसी पर ध्यान केंद्रित कर, उसे सुधरने में महत्वपूर्ण योगदान देता है। जिस प्रकार से सूर्य कि किरणे सारे अंधेरो को चीरते हुए संसार में फ़ैल जाती है और हमें सन्देश देती है की हमारी असली ऊर्जा हमारे शरीर में ही विद्यमान है और उसे खोजने के लिए हमें सारी बाहरी निर्भरताओं को त्यागना होगा चाहे वो किसी भी प्रकार की निर्भरता क्यों न हो, उसी प्रकार यह रुद्राक्ष धारक को स्वावलम्बी बनाता है, और इस रुद्राक्ष को धारण करने वाले के व्यक्तित्व को सूर्य के समान प्रकाशित कर देता है।
महत्त्व
१. इस रुद्राक्ष द्वारा दु:ख, निराशा, कुंठा, पीड़ा और दुर्भाग्य का नाश होता है।
२. बारह मुखी रुद्राक्ष को धारण करने से सभी प्रकार की शारीरिक एवं मानसिक परेशानियों का नाश होता है।
३. यह रुद्राक्ष धारक की सूझ बुझ को बढ़ाता है और धारक को समीक निर्णय सही समय पर लेने की शक्ति प्रदान करता है।
४. यह रुद्राक्ष धारक को निडर और ताकतवर बनाने में मदद करता है, और उसके ज्ञान द्वारा ही उसे सही निर्णय लेने में मदद करता है।
५. यह रुद्राक्ष व्यापारी वर्ग, राजनेताओ, व्यवस्थापकों इत्यादि के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है और ऐसे लोगो को उनके कार्य क्षेत्र में पद, प्रतिष्ठा, तथा प्रचुर धन लाभ कराता है।

लाभ:
१. आत्म सम्मान की कमी को दूर करके उसे बढ़ाता है।
२.इसे धारण करने वाले मनुष्य को अनुशासित और आत्मविश्वासी बनाता है।
३. दुसरो के प्रति निर्भरता को काम कर के आत्मनिर्भर बनाता है।
४. चिंता, तनाव और संदेह को दूर करता है।

चिकित्स्कीय लाभ:
१. पाचन तंत्र की क्रियाशीलता बढ़ाता है और उसे तंदुरुस्त रखता है।
२. पेट, अग्न्याशय, यकृत की बीमारियों, अपच, मधुमेह को।
३. वात और कफ जनित रोगो को दूर करता है।

कौन करे धारण:
सूर्य की उपासना करने वाले सभी जातक तथा जिनकी कुंडली में सूर्य कमजोर हो या बुरे फल दे रहा हो ऐसे जातको को बारह मुखी रुद्राक्ष अवश्य धारण करना चाहिए।

रुद्राक्ष मन्त्र:
इस रुद्राक्ष को धारण करने का मंत्र
“श्री सूर्याये नमः ”
“ॐ क्रौं श्रौं रौम नमः”

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जय महाकाल।।

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